अब ज़रा मैं ठहरना चाहता हूं!
अब ज़रा मैं ठहरना चाहता हूं,
बात बात पे नहीं लड़ना चाहता हूं!
सांस लेने की अब महोलत तो लें लूं,
हरी बगिया में टहलना चाहता हूं!
हंस लिया मैंने बहुत,
अब मेरे आंसुओं से मैं अपने चेहरे को धोना चाहता हूं!
मेरे मन में बड़ी उथल-पुथल है,
बस,अब ज़रा मैं ठहरना चाहता हूं!
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© Abdul Ahad GujBihari
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